2-लाईन दर्द भरी शायरी और सैड शायरी
जिन्हे फुर्सत ही नहीं हमें याद करने कीए खुदा!उनसे कह दो हम उनकी याद में फुर्सत से बैठे हैं ।
कयू नहीं देखता वह मेरी तरफकितना गरूर है उसे कफन में भी
चहरा भी मुझे अपना पढने नहीं देताअब तो हमदम भी हिजाबो में मिला करता है ।
इजाजत है मेरे महबूब तूझे दिल से जाने कीहम मोहब्बत के लिए किसी को मजबूर नहीं करते ।
मिली तो खुशी भी रूठी हूई मिली हमसेआह! लोगों के तो गम भी मुसकुराते है ।
अब कभी ना सताऐगे,मगर रूठो न हमसे यूँचाहे तो जो सजा दे तेरे रूबरू खडे हैं ।
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मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं ।
पर सुना है कि लोग सादगी में जीने नहीं देते ।
वह दोस्ती भी तेरी मुझको रहेगी याद
मेरी मुश्किलों में तेरा हंस कर गुजर जाना
किसी ने हाल पूछा मोहब्बत से मुद्दतो बाद
दर्द तो बहुत है पर उसे क्या जवाब दू 😔
जमाने ने देखा है कुछ इस अंदाज से हमें
मेरे आंसू भी नहीं औरो के आंसुओ की तरह
दिल के जख्मो पर तेरी यादों का मरहम लगाते हुए
जख्म मुसकुराने लगे हैं देख, गूलाब की तरह
वह तो हमें बेवफा कहकर चले गये
और मेरी मोहब्बत उनपर इलजाम लगाने नहीं देतीं
उमर इसी सोच में गुजार दी में ने
वह कौन-सी वफा पे सजा दे गया मुझे
गर तुम साथ चलोगे थामकर हाथ मेराRelated tag:
मजा और भी आएगा डगमगाते हुए चलने में
Sad shayari in English
2-लाईन सैड शायरी
2-लाईन सैड शायरी
हम जिंदगी के साथ बड़ी दुर तक गये ।
ये और बात है कि ताअरुफ़ नाहो सका ।
उन्हें अच्छा लगा झील सी आँखों में चमकता पानी
फिर जिंदगी भर हम अश्क बहाते ही रह गये💦
तेरे जिक्र से रौशन है मेरी महफिले सारी
ये शमा बूझादो तो अंधेरे में डूब जाऊँगी
वह मेरी जिंदगी पे हँसते थे
उनकी मय्यत पे मगर हम रो आए😭
हर सूकून छिन कर जिंदगी से मेरी
वह लम्बी उम्र की दुआ दे गया मुझे🤲
यह किसकी सिसकियाँ है मेरी तन्हाई में
शायद की मेरा दिल अभी भूला नहीं उसे
यूँ तो हमने काँटों से जख्म खाया हरबार
मगर हमें मोहब्बत हमें फूलों से आज भी है
न जाने कितने वादे करके वह मुकर गया
मगर यकीं उनकी बातों पर हमें आज भी है
वह परेशान हैं उलझी हुई जूलफो में अपनी
और जिंदगी सवारी है उलझनों से हमने
वह नफरत करता है गर हमसे तो शौक से करेहमने कब कहा हमें मोहब्बत ही चाहिए 😏
इलजाम नहीं देते हम उन्हें तकलीफदाह होने काकाँटे जो चूभे है हाथ में तो मेरी खता होगी।
साथ चाहे न दे आवाज तो मिला मुझसेवीरानों में भटकती हुई वरना मेरी सदा होगी ।
2-लाईन सैड शायरी
क्या ढूंढते हो मुझमे नजरें बदल बदल करमें तो तेरे वजूद में खुद ही कही गुम हूँ ।
जब भी उठे तेरी महफ़िल से चश्मे नम लेके उठेहर बार यह सोच कर आए थे कि तुझको हँसाऐगे जरूर ।
अजम तो रोज करता है वह मुझसे दूर जाने कावफाऐ मेरी बेडियाँ बन जाती हैं उसके कदमों की ।
बहुत मजबूती से थामा था में ने उसे ।मगर फिसलता गया वह हाथों से रेत की तरह ।
दुःख तो बहुत देता है जालिम फिर भी ।जब भी दुर्लभ जाता है बहुत याद आता है ।
जाने किस नाम से मशहूर हैं मोहब्बत तेरे शहर में ।जब भी ढूंढ उसे तो दर्द ही मिला हर बार ।
उसने जब कहा था, "हम जरूर मिलेंगे एक दिन"तबसे दहलीज़ पर बैठी यूँही इन्तजार में हुं ।
गहरा होता है जब तेरी यादों का अंधेरा ।रौशनी के लिए हम अपने दिल को जला लेते है ।
छुपाया था जो दर्द लबों पर आ ही गया ।खुद रोते थे पहले अब महफिल को रुलाए बैठे हैं ।
हर गम में मदु थे हम और हर खुशी से दुर रखा ।मेरे अहबाब ने मुझसे ताल्लुक का अजीब दस्तूर रखा ।
वह भी खड़ा है आज मेरे मुकाबिल सहर ।कल जिस एक के सिवा कोई हमारा ना था ।
न जाने क्या चाहता है ये तूफान मुझसेउछालता रहता है हर बार डूबोने के बाद।
आखिर जिंदगी ने पुछ लिया मुझसे ।कहाँ है वो शख्स जो तुम्हे मुझसे भी अज़ीज़ था ।
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