Galib ki shayari in hindi, ग़ालिब की बेहतरीन शायरी 2022, best Galib shayari in hindi

 Shayari की बात हो और ग़ालिब का ज़िक्र ना हो ऐसा तो नहीं हो सकता ।

तो क्या आप Galib ki shayari पढ्ना चाहते  हैं । या आपको Galib ki shayari पसंद है । तो आप सही जगह पर आए हैं । Best Mirza Galib ki shayari आपको ईस जगह मिलेगी।

Shayari by Galib ईस ब्लॉग में हम Galib ki famous shayari लाय है ।

Galib  का पुरा नाम मिर्जा असदुल्लाह ख़ाँ ग़ालिब था । पर वह अधिकतर असद या ग़ालिब के नाम से प्रसिद्ध थे । उनका जन्म 27 दिसम्बर 1797 को आगरा शहर में हुआ । उनकी पत्नी उमराव बेगम थी । 

मिर्जा गालिब उर्दू और फ़ारसी भाषाओं के शायर थे । और उनको उर्दू का सर्वकालिक शायर माना जाता है । वह शासकीय मुगलों के आखिरी मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के दरबारी कवि थे । 

Mirza Galib ki shayari की प्रसिद्ध पुस्तक दिवान-ए-ग़ालिब के नाम से प्रसिद्ध है । दिल्ली, कलकत्ता और आगरा में अपना जीवन गुजारने वाले  मिर्जा ग़ालिब उर्दू गजलों के लिए मशहूर हैं । 

Mirza Galib 15 फरवरी 1869 को दिल्ली में दुनिया को छोड़ कर चले गए । मगर उनकी शायरी में आज भी उनका अक्स दिखाई देता है ।


वह उर्दू  भाषा के महान शायर है । जिन्होने शायरी को एक नया रूप और अंदाज़ दिया । ग़ालिब खुद भी अपने आप को महान शायर मानते थे । जिसका पता यह शायरी से लगता है । की 


हैं और भी दुनिया में सुख़नवर बहुत अच्छे

कहते हैं कि 'ग़ालिब' का है अंदाज़-ए-बयाँ और


ग़ालिब तो चले गए यह कह कर कि:

मर गया ग़ालिब मगर याद आता है 

हर एक बात में तेरा यूँ कहना के,

यूँ होता तो क्या होता ।


मगर आज भी हमारे दिलों में शायरी बनकर जिन्दा है ।

ग़ालिब की शायरी हमें मोहब्बत करना सिखाती हैं ।

तो कभी बेवफाई के दर्द से गुज़ारती है । ग़ालिब ने जिंदगी, शराब, मौत, इश्क, ग़म, खुदा, दर्द इत्यादी पर शायरी की है ।

उनकी शायरी बहुत लाजवाब है जरूर पढें और अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें ।


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वह पूछते हैं :

वह पूछते हैं कि ग़ालिब कौन है 

कोई बतलाएं के हम बतलाएं क्या ।

               ग़ालिब Mirza Galib shayari


परिंदो से पुछ:

कितना ख़ौफ होता है रात के अंधेरे में 

जाके पुछ उन परिंदो से जिनके घर नहीं होते।

                 ग़ालिब 

Mirza Galib ki shayari



 

हम ना बदलेंगे 

हम ना बदलेंगे वक्त कि रफ़्तार के साथ 

जब भी मिलेंगे अंदाज़ पुराना होगा ।

                 ग़ालिब 

इश्क 

इश्क ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया 

वरना हम भी आदमी काम के थे ।

                  ग़ालिब 

Mirza Ghalib shayari

 

वह आए घर में 

वह आए घर में हमारे खुदा की कुदरत है 

कभी हम उनको, कभी अपने घर को देखते हैं ।

                    ग़ालिब

Mirza Galib shayari

 

उनको देखे से 

उनको देखे से आ जाती हैं मुंहपर रौनक़

वह समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है ।

                    ग़ालिब 

Mirza Galib shayari


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शराब पीने दे 

ग़ालिब शराब पीने दे मसजिद में बैठ कर 

या वह जगह बता जहां पर खुदा ना हो ।

                  ग़ालिब

Mirza Galib ki shayari



 

धोखे से जहर दे दूं 

सोचता हूँ कि धोखे से जहर दे दूं

सभी ख्वाहिशो को दावत पर बुला कर ।

                  ग़ालिब 

ख़ैरात में मिली खुशी 

ख़ैरात में मिली खुशी मुझे अच्छी नही लगती 

मैं अपने दुखों में रहता हूँ नवाबो की तरह ।

                  ग़ालिब 

Mirza Galib ki shayari



 

हजारों ख्वाहिशे एसी के 

हजारों ख्वाहिशे एसी के हर ख्वाहिश पे दम निकले 

बहुत निकले मेरे अरमान मगर फिर भी कम निकले ।

                   ग़ालिब 

हाथों की लकीरें 

हांथो की लकीरों पर मत जा ए ग़ालिब 

नसीब उनके भी होते है जिनके हाथ नहीं होते।

                    ग़ालिब 

जिंदो में ना रहे 

वह हमसे जो बिछुडे तो यूं बिछड़ गई जिंदगी ग़ालिब 

हम जिंदातो तो रहे, पर जिंदों में ना रहे ।

                 ग़ालिब 

उधार नहीं लेते 

जिंदगी से हम अपनी कुछ उधार नहीं लेते 

कफ़न भी लेते है तो अपनी जिंदगी देकर ।

                 ग़ालिब  

ना सुनों 

ना सुनों गर बुरा कहे कोई 

ना कहों गर बुरा करे कोई ।

               ग़ालिब 

लहू क्या है 

रगों में दौड़ने फिरने के हम नहीं क़ायल 

जो आंख से ही ना टपके फिर लहू क्या है ।

                ग़ालिब 

अदावत ही सही 

ख़ता किजीए ना ताल्लुक हमसे 

कुछ नहीं है तो अदावत ही सही ।

             ग़ालिब 

ख़ता = तोडना

अदावत= दुशमनी 

फ़किरो का भेस 

बदल कर फ़किरो का हम भेस ग़ालिब 

तमाशा-ए-अहल करम देखते हैं ।

               ग़ालिब 

दिल और दर्द 

दर्द जब दिल में हो तो दवा किजीए 

दिल ही जब दर्द हो तो क्या किजीए ।

                ग़ालिब 


लो वह भी कह रहे हैं के बेनंग-व-नाम है 

ये जानता अगर तो लुटाता ना घर को में 

                  ग़ालिब 


रोक लो गर ग़लत चले कोई 

बख्श दो गर ख़ता करे कोई ।

                 ग़ालिब

बात बनाए न बने 

नुकताचिं हैं, ग़म-ए-दिल  उसको सुनायें ना बने 

क्या बने बात जहां बात बनाए न बने ।

                ग़ालिब 

नींद कयू नहीं आती 

कोई उम्मीद बर नहीं आती 

कोई सुरत नजर नहीं आती ।

मौत का एक दिन मोईय्यन है, 

नींद कयू रात भर नहीं आती ।

             ग़ालिब 

उम्मीद बर न आना= उम्मीद पुरी न होना 

सुरत नजर नहीं आती = कोई रास्ता नजर न आना 

मोईय्यन = तय 

तुम ना आए 

तुम ना आए तो क्या सहर ना हुई 

हा मगर चैन से बसर ना हुई ।

मेरा नाला-ए-गीरया सुना जमाने ने 

एक तुम ही हो जिसे ख़बर ना हुई ।

            ग़ालिब 

सहर= सुबह 

नाला-ए-गरिया = रोने की आवाज 


उम्र भर हम यु ही ग़लती करते रहे ग़ालिब, 

धुल चहरे पर थी, और हम आईना साफ़ करते रहे ।

                    ग़ालिब 


हमको मालूम है जन्नत की हकीकत लेकिन, 

दिल को खुश रखने का ग़ालिब ख्याल अच्छा है ।

                       ग़ालिब 

ना था कुछ तो खुदा था, कुछ ना होता तो खुदा होता ।

डुबाया मुझको होने ने, ना में होता तो क्या होता ।

हुआ जो ग़म से युं बेहिस, गम क्या सर के कटने का,

ना होता गर जुदा तन से, तो ज़ानो पर धरा होता ।

                      ग़ालिब 

ज़ानो = कंधों 


हर एक बात पे  कहते हैं कि तु क्या है ।

तुम ही बताओ यह अंदाज़-ए-गुफ़तगु क्या है ।

                   ग़ालिब 


मेंरे बारे में कोई राय ना बनाना ग़ालिब 

मेरा वक्त भी बदलेगा, और तेरी राय भी ।

                ग़ालिब 


तोड़ा कुछ इस अदा से ताल्लुक उसने 

के सारी उम्र अपना क़सुर ढूंढते रहे ।

           ग़ालिब 


इस सादगी पे कौन न मर जाय ए खुदा ।

लडते है और हाथ में तलवार भी नहीं ।

              ग़ालिब 

मेहरबां होकर बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्त 

मैं गया वक्त नहीं हूँ कि फिर आ भी ना सकु ।

                    ग़ालिब 


बर्दाश्त नहीं तुमको किसी और के साथ देखना ।

बात शक की नहीं, हक़ की है ।

            ग़ालिब 


कुछ तो बात है मोहब्बत में वरना ।

कोई लाश के लिए ताज महल नहीं बनाता ।

                  ग़ालिब 


गुज़र जाएगा ये दर्द भी ग़ालिब जरा इत्मीनान रख ।

जब खुशी ही ठहरी तो गम की क्या अवक़ात हैं ।

                       ग़ालिब 


बेलिबास आए थे इस दुनिया में ग़ालिब 

सिर्फ एक कफ़न के लिए इतना सफ़र कर गए।

                     ग़ालिब 


दुःख देकर सवाल करते हो ।

तुम भी ग़ालिब कमाल करते हो ।

देख कर पुछ लिया हाल मेरा, 

चलो कुछ तो खयाल करते हो ।

            ग़ालिब 


आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक ।

कौन जीता है तेरी ज़ुल्फ के सर होने तक । 

              ग़ालिब 


जब लगा था तीर तब इतना दर्द ना हुआ ग़ालिब 

जख्म का एहसास तो तब हुआ जब कमान देखी अपनों के हाथ में ।

                         ग़ालिब   

हम रुठे दिलों को मनाने में रहे गाए । 

गैरों को अपना दर्द सुनाने में रहे गए ।

मंजिल हमारी, हमारे क़रीब से गुजर गई । 

हम दूसरों को रास्ता दिखाने में रहे गए ।

                   ग़ालिब 


आखरी बात: अगर आपको Mirza Galib ki shayari पसंद आए तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें । धन्यवाद 🙏















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